कुरान - 26:18 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
قَالَ أَلَمۡ نُرَبِّكَ فِينَا وَلِيدٗا وَلَبِثۡتَ فِينَا مِنۡ عُمُرِكَ سِنِينَ

Transliteration: (Qaala alam nurabbika feenaa waleedanw wa labista feenaa min 'umurika sineen)

(फ़िरऔन ने) कहा, 'क्या हमने तुम्हें अपने यहाँ बचपन में नहीं पाला था, और तुमने अपनी उम्र के कई साल हमारे दरमियान नहीं गुज़ारे [24]? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 18

"(फ़िरऔन ने) कहा, 'क्या हमने तुम्हें बचपन में नहीं पाला था, और तुमने अपनी उम्र के कई साल हमारे दरमियान नहीं गुज़ारे [24]?'"

[24] फ़िरऔन का परवरिश का एहसान जताना

फ़िरऔन ने जब देखा कि उसके पास मूसा अलैहिस्सलाम के दलाइल का कोई जवाब नहीं, तो उसने बात को घुमाने के लिए एहसान जताना शुरू किया। उसने कहा: क्या तुम वही मूसा नहीं हो जिसे हमने दरिया से उठाकर अपने महल में शाही नाज़-ओ-नेअम में पाला था और तीस साल तक तुमने हमारे ही दस्तरख़्वान पर खाना खाया? आज तुम ही हमारे मुक़ाबले में खड़े होकर हमें नसीहत कर रहे हो?

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