कुरान - 26:21 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

21
فَفَرَرۡتُ مِنكُمۡ لَمَّا خِفۡتُكُمۡ فَوَهَبَ لِي رَبِّي حُكۡمٗا وَجَعَلَنِي مِنَ ٱلۡمُرۡسَلِينَ

Transliteration: (Fafarartu minkum lam maa khiftukum fawahaba lee Rabbee hukmanw wa ja'alanee minal mursaleen)

फिर जब मुझे तुमसे ख़ौफ़ हुआ तो मैं तुम्हारे पास से भाग गया [28]; फिर मेरे रब ने मुझे हिकमत (हुकूमत व इल्म) बख़्शी और मुझे रसूलों में से बना दिया [29]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 21 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 21

"फिर जब तुमसे ख़ौफ़ हुआ तो भाग गया [28]; फिर रब ने हिकमत बख़्शी और रसूलों में से बनाया [29];"

[28] मदयन की तरफ़ हिजरत

हज़रत मूसा ने फ़रमाया कि जब मुझे मालूम हुआ कि तुम मुझे क़त्ल करने की साज़िश कर रहे हो, तो मैं अपनी जान की हिफ़ाज़त के लिए मिस्र छोड़कर मदयन की तरफ़ हिजरत कर गया।

[29] मन्सब-ए-रिसालत और हिकमत का अता होना

वहाँ दस साल गुज़ारने के बाद अल्लाह तआला ने मुझे हिकमत, इल्म और नबुव्वत का अज़ीम मन्सब अता फ़रमाया और अपना रसूल बनाकर तुम्हारी तरफ़ भेजा है। अब मैं कोई आम इंसान नहीं बल्कि अल्लाह का मुअज़्ज़ज़ पैग़म्बर हूँ।

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