Transliteration: (Wa tilka ni'matun tamun nuhaa 'alaiya an 'abbatta Baneee Israaa'eel)
"और क्या यह तुम्हारा एहसान है जो मुझ पर जताते हो कि बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा है [30]?'"
हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन के एहसान जताने की धज्जियाँ उड़ाते हुए फ़रमाया: तू मुझे अपने घर पालने का एहसान जताता है, लेकिन यह तो सोच कि मुझे तेरे महल में पलने की नौबत क्यों आई? तूने बनी इसराईल के लाखों मासूम बेटों को ज़बह करा दिया था, जिसके ख़ौफ़ से मेरी माँ ने मुझे संदूक़ में रखकर दरिया में बहाया और मैं तेरे घर पहुंचा! क्या पूरी क़ौम को ग़ुलाम बनाकर उनके बच्चों को ज़बह करना और उनमें से एक को पाल लेना कोई एहसान है? यह तो तेरा अज़ीम ज़ुल्म है!
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