कुरान - 26:22 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
وَتِلۡكَ نِعۡمَةٞ تَمُنُّهَا عَلَيَّ أَنۡ عَبَّدتَّ بَنِيٓ إِسۡرَـٰٓءِيلَ

Transliteration: (Wa tilka ni'matun tamun nuhaa 'alaiya an 'abbatta Baneee Israaa'eel)

और क्या यह तुम्हारा वह एहसान है जो तुम मुझ पर जता रहे हो कि तुमने बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा है [30]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 22

"और क्या यह तुम्हारा एहसान है जो मुझ पर जताते हो कि बनी इसराईल को ग़ुलाम बना रखा है [30]?'"

[30] फ़िरऔन के एहसान का मुसक्कत जवाब

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़िरऔन के एहसान जताने की धज्जियाँ उड़ाते हुए फ़रमाया: तू मुझे अपने घर पालने का एहसान जताता है, लेकिन यह तो सोच कि मुझे तेरे महल में पलने की नौबत क्यों आई? तूने बनी इसराईल के लाखों मासूम बेटों को ज़बह करा दिया था, जिसके ख़ौफ़ से मेरी माँ ने मुझे संदूक़ में रखकर दरिया में बहाया और मैं तेरे घर पहुंचा! क्या पूरी क़ौम को ग़ुलाम बनाकर उनके बच्चों को ज़बह करना और उनमें से एक को पाल लेना कोई एहसान है? यह तो तेरा अज़ीम ज़ुल्म है!

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