Transliteration: (Wa taqallubaka fis saajideen)
"और सजदा करने वालों में आपकी हरक़त को भी [217];"
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा से इस आयत की तफ़सीर में मरवी है कि 'तक़ल्लुबका फ़िस-साजिदीन' से मुराद हुज़ूर अक़दस ﷺ के पाकीज़ा नूर का हज़रत आदम अलैहिस्सलाम से लेकर हज़रत अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु तक एक साजिद व मोमिन की पुश्त से दूसरे साजिद व मुवह्हिद की पुश्त में मुंतक़िल होना है।
इससे साफ़ साबित हुआ कि हुज़ूर अक़दस ﷺ के आबाओ-अजदाद में हज़रत आदम से लेकर हज़रत अब्दुल्लाह तक कोई भी शख़्स काफ़िर या मुशरिक नहीं था, बल्कि सब के सब अल्लाह के सच्चे मुवह्हिद और सजदा करने वाले मोमिन थे। आपका नसब-ए-आली कायनात का सबसे पाकीज़ा और मुक़द्दस तरीन नसब है।
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