कुरान - 26:217 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

217
وَتَوَكَّلۡ عَلَى ٱلۡعَزِيزِ ٱلرَّحِيمِ

Transliteration: (Wa tawakkal alal 'Azeezir Raheem)

और उस ज़ात पर भरोसा (तवक्कुल) रखिए जो ज़बरदस्त (ग़ालिब) और बेहद रहम फ़रमाने वाली है [215]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 217 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 217

"और उस ज़ात पर भरोसा रखिए जो ज़बरदस्त और बेहद रहम फ़रमाने वाली है [215];"

[215] हक़ीक़त-ए-तवक्कुल: अस्बाब के साथ ख़ुदा पर भरोसा

तवक्कुल का मतलब अस्बाब को छोड़ देना नहीं, बल्कि दुनियावी अस्बाब व तदाबीर इख़्तियार करने के बाद नतीजा अल्लाह तआला के सुपुर्द करना है। हुज़ूर ﷺ ने जिहाद के तमाम अस्बाब, हथियार और लश्कर तैयार फ़रमाए और फिर क़ादिर-ए-मुतलक़ अल्लाह पर भरोसा रखा जो हर दुश्मन पर ग़ालिब है।

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