Transliteration: (Wa naza'a yadahoo faizaa hiya baidaaa'u linnaa zireen (section 2))
"और उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला, तो अचानक वह देखने वालों के सामने चमकता हुआ सफ़ेद था [42]!"
फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना दस्त-ए-मुबारक अपने गरेबान (बग़ल) में डाला और जब बाहर निकाला, तो वह सूरज की तरह चमक रहा था और उसकी रौशनी से पूरा दरबार जगमगा उठा। यह सफ़ेदी किसी बीमारी या कोढ़ की वजह से नहीं थी बल्कि अल्लाह के नूर का मुअजिज़ ज़हूर था।
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