कुरान - 26:33 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَنَزَعَ يَدَهُۥ فَإِذَا هِيَ بَيۡضَآءُ لِلنَّـٰظِرِينَ

Transliteration: (Wa naza'a yadahoo faizaa hiya baidaaa'u linnaa zireen (section 2))

और उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला, तो अचानक वह देखने वालों के सामने निहायत चमकता हुआ सफ़ेद था [42]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 33

"और उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला, तो अचानक वह देखने वालों के सामने चमकता हुआ सफ़ेद था [42]!"

[42] यद-ए-बैज़ा (चमकता हुआ हाथ) का दूसरा मोजिज़ा

फिर हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना दस्त-ए-मुबारक अपने गरेबान (बग़ल) में डाला और जब बाहर निकाला, तो वह सूरज की तरह चमक रहा था और उसकी रौशनी से पूरा दरबार जगमगा उठा। यह सफ़ेदी किसी बीमारी या कोढ़ की वजह से नहीं थी बल्कि अल्लाह के नूर का मुअजिज़ ज़हूर था।

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