कुरान - 26:32 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
فَأَلۡقَىٰ عَصَاهُ فَإِذَا هِيَ ثُعۡبَانٞ مُّبِينٞ

Transliteration: (Fa alqaa 'asaahu fa izaaa hiya su'baanum mubeen)

तो मूसा ने अपना असा (लाठी) ज़मीन पर डाल दिया, पस अचानक वह एक साफ़ ज़ाहिर अज़दहा बन गया [41]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 32

"तो मूसा ने अपना असा डाल दिया, पस अचानक वह एक साफ़ ज़ाहिर अज़दहा बन गया [41]!"

[41] असा-ए-मूसा का अज़दहा बनना (पहला अज़ीम मोजिज़ा)

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने अपना मुक़द्दस असा ज़मीन पर डाला, तो वह फ़ौरन एक बहुत बड़ा, हैबतनाक और ज़िन्दा अज़दहा (सुअबान-ए-मुबीन) बन गया जो फुंकारें मार रहा था और जिसकी आँखें अंगारों की तरह चमक रही थीं। उसे देखकर फ़िरऔन और उसके दरबारी ख़ौफ़ से थर-थर कांपने लगे और अपनी जान बचाकर भागने लगे। यह नज़रबंदी नहीं बल्कि कु़दरत-ए-इलाही का हक़ीक़ी मोजिज़ा था।

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