कुरान - 26:30 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
قَالَ أَوَلَوۡ جِئۡتُكَ بِشَيۡءٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Qaala awalaw ji'tuka bishai'im mubeen)

(मूसा ने) फ़रमाया, 'क्या तब भी (तुम मुझे क़ैद करोगे) अगर मैं तुम्हारे पास कोई खुली रौशन चीज़ (मोजिज़ाना दलील) ले आऊं [39]?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 30

"(मूसा ने) फ़रमाया, 'क्या तब भी जब मैं तुम्हारे पास कोई खुली रौशन चीज़ ले आऊं [39]?'"

[39] मोजिज़ात-ए-काहिरा पेश करने की पेशकश

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम फ़िरऔन की जेल की धमकी से ज़रा बराबर भी ख़ौफ़ज़दा न हुए, बल्कि निहायत इस्तिक़ामत और वक़ार से फ़रमाया: क्या तू तब भी ज़ुल्म करेगा अगर मैं तेरी आँखों के सामने ऐसी खुली, वाज़ेह और रौशन निशानी (मोजिज़ा) पेश कर दूँ जिसे देखकर पूरी दुनिया मान ले कि मैं सच्चे ख़ुदा का सच्चा रसूल हूँ?

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