कुरान - 26:28 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

28
قَالَ رَبُّ ٱلۡمَشۡرِقِ وَٱلۡمَغۡرِبِ وَمَا بَيۡنَهُمَآۖ إِن كُنتُمۡ تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Qaala Rabbul mashriqi wal maghribi wa maa baina humaa in kuntum ta'qiloon)

(मूसा ने) फ़रमाया, 'वह मशरिक़ (पूरब) और मग़रिब (पश्चिम) का और जो कुछ उनके दरमियान है उस सबका रब है, अगर तुम अक़्ल रखते हो [37]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 28 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 28

"(मूसा ने) फ़रमाया, 'वह मशरिक़ व मग़रिब और जो कुछ उनके बीच है उसका रब है, अगर अक़्ल रखते हो [37]!'"

[37] मशरिक़ व मग़रिब की रूबूबियत और अक़्ल को दावत

हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया: दीवाना मैं नहीं, बल्कि दीवाने तुम हो जो सूरज, चाँद और कायनात का इतना मुनज़्ज़म निज़ाम देखकर भी उसके बनाने वाले को नहीं पहचानते। मेरा रब वह है जिसके हुक्म से सूरज पूरब से निकलता है और पश्चिम में डूबता है। अगर तुम में थोड़ी सी भी अक़्ल है तो सोचो कि क्या कोई इंसान या बुत सूरज की इस गर्दिश पर क़ादिर हो सकता है?

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now