कुरान - 26:29 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
قَالَ لَئِنِ ٱتَّخَذۡتَ إِلَٰهًا غَيۡرِي لَأَجۡعَلَنَّكَ مِنَ ٱلۡمَسۡجُونِينَ

Transliteration: (Qaala la'init takhazta ilaahan ghairee la aj'alannaka minal masjooneen)

(फ़िरऔन ने) कहा, 'अगर तुमने मेरे सिवा किसी और को माबूद बनाया, तो मैं तुम्हें ज़रूर क़ैदियों में डाल दूंगा [38]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 29

"(फ़िरऔन ने) कहा, 'अगर मेरे सिवा किसी को माबूद बनाया, तो तुम्हें क़ैदियों में डाल दूंगा [38]!'"

[38] दलील के मुक़ाबले में ताक़त और जेल की धमकी

जब फ़िरऔन तमाम दलाइल में मुकम्मल तौर पर शिकस्त खा गया, तो उसने अपनी बादशाही ताक़त का घमंड दिखाते हुए हज़रत मूसा को धमकी दी कि अगर तूने मेरे सिवा किसी और को माबूद माना, तो मैं तुझे उन क़ैदियों में डाल दूंगा जो मेरी तारीक काल-कोठरियों में सड़ रहे हैं। तानाशाही का यही उसूल है कि जब दलील ख़त्म होती है तो ज़ुल्म शुरू होता है।

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