कुरान - 26:44 सूरह अश-शुअरा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
فَأَلۡقَوۡاْ حِبَالَهُمۡ وَعِصِيَّهُمۡ وَقَالُواْ بِعِزَّةِ فِرۡعَوۡنَ إِنَّا لَنَحۡنُ ٱلۡغَٰلِبُونَ

Transliteration: (Fa alqaw hibaalahum wa 'isiyyahum wa qaaloo bi'izzati Fir'awna innaa lanahnul ghaaliboon)

तो उन्होंने अपनी रस्सियां और अपनी लाठियां डाल दीं और कहने लगे, 'फ़िरऔन की इज़्ज़त की क़सम! यक़ीनन हम ही ग़ालिब रहने वाले हैं [51]!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अश-शुअरा आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

तफ़सीर सूरह अश-शुआरा – आयत 44

"तो उन्होंने रस्सियां और लाठियां डाल दीं और बोले, 'फ़िरऔन की इज़्ज़त की क़सम! हम ही ग़ालिब रहेंगे [51]!'"

[51] जादू का तमाशा और फ़िरऔन की इज़्ज़त की क़सम

जादूगरों ने हज़ारों रस्सियाँ और लाठियाँ ज़मीन पर फेंकीं जिनमें पारा (Mercury) भरा हुआ था। धूप की गर्मी से वे रस्सियाँ सांपों की तरह बल खाने और दौड़ने लगीं, और जादूगर फ़िरऔन की इज़्ज़त की झूठी क़सम खाकर अपनी जीत का दावा करने लगे।

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