कुरान - 38:50 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
جَنَّـٰتِ عَدۡنٖ مُّفَتَّحَةٗ لَّهُمُ ٱلۡأَبۡوَٰبُ

Transliteration: (Jannaati 'adnin mufattahatan lahumul abwaab)

हमेशा रहने के बाग़ात (जन्नत), जिनके दरवाज़े उनके लिए खुले होंगे [98]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 50

"हमेशा रहने के बाग़ात (जन्नत), जिनके दरवाज़े उनके लिए खुले होंगे [98]!"

[98] जन्नत के हमेशा खुले दरवाज़े

जन्नत के दरवाज़े अहले ईमान के दाख़िले के लिए हमेशा खुले रहेंगे; उन्हें किसी रुकावट या मशक़्क़त का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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