Transliteration: (Qul maaa as'alukum 'alaihi min ajrinw wa maaa ana minal mutakallifeen)
"आप फ़रमा दीजिए: मैं इस (क़ुरआन) पर तुमसे कोई उजरत नहीं माँगता [145], और न ही मैं बनावट (दिखावा) करने वालों में से हूँ [146]!"
हुज़ूर ﷺ की तब्लीग़ महज़ रज़ा-ए-इलाही के लिए है, आप उम्मत से किसी दुनियावी बदले या माल के तलबगार नहीं।
आपकी हर बात वही-ए-इलाही पर मबनी है, कोई मनघड़ंत या तकल्लुफ़ वाली बात नहीं।
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