कुरान - 12:59 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَلَمَّا جَهَّزَهُم بِجَهَازِهِمۡ قَالَ ٱئۡتُونِي بِأَخٖ لَّكُم مِّنۡ أَبِيكُمۡۚ أَلَا تَرَوۡنَ أَنِّيٓ أُوفِي ٱلۡكَيۡلَ وَأَنَا۠ خَيۡرُ ٱلۡمُنزِلِينَ

Transliteration: (Wa lammaa jahhazahum bijahaazihim qaala' toonee bi akhil lakum min abeekum; alaa tarawna anneee oofil kaila wa ana khairul munzileen)

और जब यूसुफ़ ने उन्हें उनका रसद (अनाज का सामान) तैयार करवा दिया, तो कहा, "(अगली बार) अपने पिता की ओर से अपने उस (सौतेले) भाई को भी मेरे पास ले आना; क्या तुम देखते नहीं कि मैं पूरा नाप देता हूँ और मैं सबसे उत्तम मेज़बान हूँ?" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 59 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बिन्यामीन को बुलाने की हिकमत

हज़रत यूसुफ़ ने अपने सगे छोटे भाई बिन्यामीन को देखने और बुलाने के लिए हिकमत अपनाई। उन्होंने भाइयों का शाही सत्कार किया, अनाज का पूरा कोटा दिया और शर्त रखी कि अगली बार अपने उस छोटे भाई को साथ लेकर आना जिसे तुम घर छोड़ आए हो।

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