कुरान - 12:111 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
لَقَدۡ كَانَ فِي قَصَصِهِمۡ عِبۡرَةٞ لِّأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِۗ مَا كَانَ حَدِيثٗا يُفۡتَرَىٰ وَلَٰكِن تَصۡدِيقَ ٱلَّذِي بَيۡنَ يَدَيۡهِ وَتَفۡصِيلَ كُلِّ شَيۡءٖ وَهُدٗى وَرَحۡمَةٗ لِّقَوۡمٖ يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Laqad kaana fee qasasihim 'ibratul li ulil albaab; maa kaana hadeethany yuftaraa wa laakin tasdeeqal lazee baina yadaihi wa tafseela kulli shai'inw wa hudanw wa rahmatal liqawminy yu'minoon)

निश्चय ही उनके वृत्तांत (क़िस्से) में बुद्धिमानों के लिए बड़ी शिक्षा (इब्रत) है। यह (क़ुरआन) कोई गढ़ी हुई बात नहीं है, बल्कि उन (आसमानी किताबों) की पुष्टि है जो इससे पहले थीं, और हर चीज़ का विस्तृत विवरण है, तथा ईमान लाने वाले लोगों के लिए मार्गदर्शन (हिदायत) और दया (रहमत) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 111 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] सूरह यूसुफ़ का निचोड़ और अहसनुल क़सस

हज़रत यूसुफ़ (अलै.) का यह ऐतिहासिक वाक़िआ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि अक़्ल वालों के लिए सब्र, तवक्कुल, पाकदामनी, माफ़ी और तौहीद का सबसे महान सबक़ है। जो सब्र करता है, अल्लाह उसे ज़मीन की गहराइयों (कुएं) से उठाकर आसमान की बुलंदी (हुकूमत) पर पहुंचा देता है।

✅ [2] क़ुरआन-ए-करीम की हक़्क़ानियत

यह मुक़द्दस क़ुरआन पिछली किताबों की तस्दीक करता है, दीन व दुनिया के ज़रूरी अहकाम की तफ़्सील बयान करता है और अहले-ईमान के लिए हिदायत व रहमत का दरिया है।

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