Transliteration: (Laqad kaana fee qasasihim 'ibratul li ulil albaab; maa kaana hadeethany yuftaraa wa laakin tasdeeqal lazee baina yadaihi wa tafseela kulli shai'inw wa hudanw wa rahmatal liqawminy yu'minoon)
हज़रत यूसुफ़ (अलै.) का यह ऐतिहासिक वाक़िआ केवल एक कहानी नहीं, बल्कि अक़्ल वालों के लिए सब्र, तवक्कुल, पाकदामनी, माफ़ी और तौहीद का सबसे महान सबक़ है। जो सब्र करता है, अल्लाह उसे ज़मीन की गहराइयों (कुएं) से उठाकर आसमान की बुलंदी (हुकूमत) पर पहुंचा देता है।
यह मुक़द्दस क़ुरआन पिछली किताबों की तस्दीक करता है, दीन व दुनिया के ज़रूरी अहकाम की तफ़्सील बयान करता है और अहले-ईमान के लिए हिदायत व रहमत का दरिया है।
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