कुरान - 12:109 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
وَمَآ أَرۡسَلۡنَا مِن قَبۡلِكَ إِلَّا رِجَالٗا نُّوحِيٓ إِلَيۡهِم مِّنۡ أَهۡلِ ٱلۡقُرَىٰٓۗ أَفَلَمۡ يَسِيرُواْ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَيَنظُرُواْ كَيۡفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡۗ وَلَدَارُ ٱلۡأٓخِرَةِ خَيۡرٞ لِّلَّذِينَ ٱتَّقَوۡاْۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Wa maaa arsalnaa min qablika illaa rijaalan nooheee ilaihim min ahlil quraa; afalam yaseeroo fil ardi fa yanzuroo kaifa kaana 'aaqibatul lazeena min qablihim; wa la Daarul Aakhirati Khairul lillazeenat taqaw; afalaa ta'qiloon)

और हमने आपसे पहले भी बस्तियों के रहने वालों में से केवल पुरुषों (इंसानों) ही को रसूल बनाकर भेजा था जिनकी ओर हम वह्य करते थे। तो क्या वे ज़मीन में चले-फिरे नहीं कि देखते कि उनसे पहले के लोगों का कैसा अंजाम हुआ? और परहेज़गारों (अल्लाह से डरने वालों) के लिए तो आख़िरत का घर ही सबसे बेहतर है; तो क्या तुम अक़्ल से काम नहीं लेते? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 109 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] पैग़म्बर फ़रिश्ते नहीं बल्कि इंसान होते हैं

मुश्रिकों का यह ऐतराज़ था कि रसूल कोई फ़रिश्ता क्यों नहीं? अल्लाह ने फ़रमाया कि हमेशा इंसानों की हिदायत के लिए इंसानों में से ही मुक़द्दस मर्दों को रसूल बनाकर भेजा गया ताकि वे इंसानों के लिए व्यावहारिक आदर्श बन सकें।

✅ [2] पिछली क़ौमों के इतिहास से सबक़

सफ़र करके पिछली तबाहशुदा क़ौमों (आद, समूद, लूत) के खंडहरों को देखो और समझो कि अल्लाह के पैग़म्बरों को झुठलाने का अंजाम कितना भयानक होता है।

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