कुरान - 12:106 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

106
وَمَا يُؤۡمِنُ أَكۡثَرُهُم بِٱللَّهِ إِلَّا وَهُم مُّشۡرِكُونَ

Transliteration: (Wa maa yu'minu aksaru hum billaahi illaa wa hum mushrikoon)

और उनमें से अधिकांश लोग अल्लाह पर ईमान नहीं लाते मगर इस हाल में कि वे उसके साथ शिर्क भी करते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 106 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 106 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] शिर्क की बुराई और ईमान की मिलावट

मक्का के मुश्रिक भी मानते थे कि पैदा करने वाला और रिज़्क़ देने वाला अल्लाह ही है, मगर इबादत, दुआ, नज़र-नियाज़ और हाजत-रवाई में बुतों व मख़लूक़ को शरीक ठहराते थे। अल्लाह को मानकर भी उसके साथ शिर्क करना ईमान को बर्बाद कर देता है।

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