कुरान - 12:108 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

108
قُلۡ هَٰذِهِۦ سَبِيلِيٓ أَدۡعُوٓاْ إِلَى ٱللَّهِۚ عَلَىٰ بَصِيرَةٍ أَنَا۠ وَمَنِ ٱتَّبَعَنِيۖ وَسُبۡحَٰنَ ٱللَّهِ وَمَآ أَنَا۠ مِنَ ٱلۡمُشۡرِكِينَ

Transliteration: (Qul haazihee sabeeleee ad'ooo ilal laah; 'alaa baseera tin ana wa manit taba'anee wa Subhaanal laahi wa maaa ana minal mushrikeen)

कह दीजिए, "यह मेरा रास्ता है; मैं पूर्ण अंतर्दृष्टि (सत्य ज्ञान) के साथ अल्लाह की ओर बुलाता हूँ—मैं भी और वे भी जिन्होंने मेरा अनुसरण किया है। और अल्लाह पवित्र है, और मैं शिर्क करने वालों में से नहीं हूँ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 108 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 108 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] बसीरत के साथ दावत-ए-हक़

रसूलुल्लाह ﷺ और आपके सच्चे पैरोकारों का तरीक़ा यह है कि वे अंधविश्वास या ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि ठोस दलीलों, ज्ञान और बसीरत (हिकमत) के साथ लोगों को केवल एक अल्लाह की तरफ़ बुलाते हैं।

✅ [2] तौहीद की पाकीज़गी और शिर्क से बरी होना

इस्लाम का मूल आधार अल्लाह की तस्बीह (पाकीज़गी) और हर प्रकार के शिर्क से मुकम्मल दूरी है।

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