कुरान - 12:110 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
حَتَّىٰٓ إِذَا ٱسۡتَيۡـَٔسَ ٱلرُّسُلُ وَظَنُّوٓاْ أَنَّهُمۡ قَدۡ كُذِبُواْ جَآءَهُمۡ نَصۡرُنَا فَنُجِّيَ مَن نَّشَآءُۖ وَلَا يُرَدُّ بَأۡسُنَا عَنِ ٱلۡقَوۡمِ ٱلۡمُجۡرِمِينَ

Transliteration: (Hattaaa izas tai'asar Rusulu wa zannooo annahum qad kuziboo jaaa'ahum nas runaa fanujjiya man nashaaa'u wa laa yuraddu ba'sunna 'anil qawmil mujrimeen)

यहाँ तक कि जब रसूल (क़ौम के ईमान लाने से) निराश होने लगे और लोगों ने समझा कि उनसे झूठ बोला गया था, तब हमारी मदद उनके पास आ पहुंची; फिर जिसे हमने चाहा उसे बचा लिया गया, और हमारा अज़ाब गुनहगार (अपराधी) क़ौम से कभी टाला नहीं जाता। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 110 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] आज़माइश की इंतिहा और अल्लाह की मदद का नुज़ूल

जब आज़माइशें और ज़ुल्म अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच जाते हैं और ऐसा लगता है कि अब कोई उम्मीद नहीं बची, ठीक उसी नाज़ुक मोड़ पर अल्लाह की ग़ैबी मदद आती है।

✅ [2] हक़ की फ़तह और मुजरिमों का विनाश

अल्लाह अपने रसूलों और अहले-ईमान को बचा लेता है और हठधर्मी ज़ालिमों पर ऐसा अज़ाब मुसल्लत करता है जिसे कोई टाल नहीं सकता।

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