कुरान - 12:105 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
وَكَأَيِّن مِّنۡ ءَايَةٖ فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ يَمُرُّونَ عَلَيۡهَا وَهُمۡ عَنۡهَا مُعۡرِضُونَ

Transliteration: (Wa ka ayyim min Aayatin fis samaawaati wal ardi yamurroona 'alaihaa wa hum 'anhaa mu'ridoon)

और आकाशों तथा धरती में कितनी ही निशानियां हैं जिन पर से वे गुज़रते रहते हैं, और वे उनसे मुँह मोड़े (लापरवाह) रहते हैं! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 105 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कायनात में बिखरी तौहीद की निशानियां

सूरज, चांद, सितारे, ज़मीन, पहाड़, पेड़-पौधे और इंसान का अपना वुजूद हर घड़ी अल्लाह की वहदानियत और क़ुदरत की गवाही दे रहे हैं, मगर ग़ाफ़िल इंसान उन पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र किए बिना अंधे बनकर गुज़र जाता है।

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