कुरान - 12:103 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

103
وَمَآ أَكۡثَرُ ٱلنَّاسِ وَلَوۡ حَرَصۡتَ بِمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa maa aksarun naasi wa law harasta bimu'mineen)

और चाहे आप कितनी भी तीव्र इच्छा करें, अधिकांश लोग ईमान लाने वाले नहीं हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 103 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 103 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नबी ﷺ को तसल्ली

रसूलुल्लाह ﷺ मक्का के मुश्रिकों के ईमान लाने के लिए अत्यधिक व्याकुल और बेचैन रहते थे। अल्लाह ने तसल्ली दी कि बहुसंख्यक लोग हक़ को देखकर भी अपनी ज़िद और हठधर्मी के कारण ईमान नहीं लाएंगे, इसलिए आप अपनी जान को ग़म में न घुलाएं।

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