कुरान - 12:104 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

104
وَمَا تَسۡـَٔلُهُمۡ عَلَيۡهِ مِنۡ أَجۡرٍۚ إِنۡ هُوَ إِلَّا ذِكۡرٞ لِّلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Wa maa tas'aluhum 'alaihi min ajr; in huwa illaa zikrul lil'aalameen)

और आप इस (दावत व क़ुरआन) पर उनसे कोई पारिश्रमिक (बदला या फ़ीस) नहीं मांगते; यह तो संसार भर के लोगों के लिए केवल एक नसीहत और अनुस्मारक है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 104 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 104 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] निस्वार्थ दावत-ए-दीन

अंबिया किराम का हमेशा यह उसूल रहा कि वे दावत-ए-हक़ के बदले दुनिया की कोई दौलत या इज़्ज़त तलब नहीं करते। क़ुरआन सारे जहान के इंसानों की हिदायत और भलाई के लिए एक अनमोल नसीहत है।

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