कुरान - 12:58 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

58
وَجَآءَ إِخۡوَةُ يُوسُفَ فَدَخَلُواْ عَلَيۡهِ فَعَرَفَهُمۡ وَهُمۡ لَهُۥ مُنكِرُونَ

Transliteration: (Wa jaaa'a ikhwatu Yoosufa fadakhaloo 'alaihi fa'arafahum wa hum lahoo munkiroon)

और (अकाल के दिनों में) यूसुफ़ के भाई आए और उनके सामने उपस्थित हुए, तो यूसुफ़ ने उन्हें तुरंत पहचान लिया जबकि वे उनसे बिल्कुल बेख़बर (अनजान) थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 58 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 58 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कनान से भाइयों का अनाज के लिए आगमन

कनान (फ़िलिस्तीन) में भी अकाल पड़ा। हज़रत याक़ूब ने अपने दस बेटों को अनाज खरीदने मिस्र भेजा। जब वे दरबार में पहुँचे, तो हज़रत यूसुफ़ ने अपने सौतेले भाइयों को पहली ही नज़र में पहचान लिया, लेकिन वे कभी सोच भी नहीं सकते थे कि जिस भाई को उन्होंने कुएं में फेंका था वह आज मिस्र का अधिपति बना बैठा है।

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