कुरान - 12:56 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

56
وَكَذَٰلِكَ مَكَّنَّا لِيُوسُفَ فِي ٱلۡأَرۡضِ يَتَبَوَّأُ مِنۡهَا حَيۡثُ يَشَآءُۚ نُصِيبُ بِرَحۡمَتِنَا مَن نَّشَآءُۖ وَلَا نُضِيعُ أَجۡرَ ٱلۡمُحۡسِنِينَ

Transliteration: (Wa kazaalika makkannaa li Yoosufa fil ardi yatabawwa'u minhaa haisu yashaaaa'; nuseebu birahmatinaa man nashaaa'u wa laa nudee'u ajral muhsineen)

और इसी प्रकार हमने यूसुफ़ को उस ज़मीन (मिस्र) में सत्ता और अधिकार अता किया; वे उसमें जहाँ चाहें अपना मुक़ाम बना सकते थे; हम अपनी दया जिसे चाहते हैं पहुँचाते हैं, और हम नेकी करने वालों का बदला कभी ज़ाया नहीं करते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 56 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 56 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] कुएँ से निकलकर मिस्र के तख़्त पर

जो यूसुफ़ कभी ग़ुलाम बनकर बीस दिरहम में बिके थे और सालों जेल की काल-कोठरी में रहे, अल्लाह ने उनके सब्र और तक़्वे के बदले उन्हें पूरे मिस्र का सर्वेसर्वा और बादशाह बना दिया। अल्लाह नेक बंदों की मेहनत को कभी व्यर्थ नहीं जाने देता।

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