कुरान - 12:55 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

55
قَالَ ٱجۡعَلۡنِي عَلَىٰ خَزَآئِنِ ٱلۡأَرۡضِۖ إِنِّي حَفِيظٌ عَلِيمٞ

Transliteration: (Qaalaj 'alnee 'alaa khazaaa'inil ardi innee hafeezun 'aleem)

यूसुफ़ ने कहा, "मुझे देश के ख़ज़ानों (अर्थव्यवस्था व कृषि) का प्रबंधक बना दीजिए; निस्संदेह, मैं पूरी तरह हिफ़ाज़त करने वाला (अमानतदार) और पूर्ण ज्ञान रखने वाला हूँ।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 55 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 55 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "إِنِّي حَفِيظٌ عَلِيمٌ" – सार्वजनिक पद की योग्यता

हज़रत यूसुफ़ ने सत्ता या शान की लालसा में पद नहीं मांगा, बल्कि आने वाले भयानक अकाल से लाखों इंसानों की जान बचाने के लिए वित्त और खाद्य मंत्रालय की ज़िम्मेदारी मांगी। उन्होंने सार्वजनिक पद के दो अनिवार्य मापदंड बताए: 'हफ़ीज़' (सच्चा, ईमानदार, भ्रष्टाचार मुक्त) और 'अलीम' (अपने काम में पूर्ण दक्ष व विशेषज्ञ)।

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