कुरान - 12:53 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

53
۞وَمَآ أُبَرِّئُ نَفۡسِيٓۚ إِنَّ ٱلنَّفۡسَ لَأَمَّارَةُۢ بِٱلسُّوٓءِ إِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّيٓۚ إِنَّ رَبِّي غَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Wa maa ubarri'u nafsee; innan nafsa la ammaaratum bissooo'i illaa maa rahima Rabbee; inna Rabbee Ghafoorur Raheem)

"और मैं अपने नफ़्स (मन) को पूरी तरह निर्दोष नहीं ठहराता; निस्संदेह, नफ़्स तो बुराई पर उभारने वाला ही है, सिवाय इसके जिस पर मेरा रब दया करे; बेशक मेरा रब बहुत क्षमाशील, अत्यंत दयालु है।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 53 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 53 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] 'नफ़्स-ए-अम्मारा' (बुराई पर उकसाने वाला मन) और विनम्रता

इंसान का मूल नफ़्स (मन) स्वाभाविक रूप से वासना और बुराई की ओर झुकता है, जब तक कि अल्लाह की रहमत और मार्गदर्शन उसे थाम न ले। हज़रत यूसुफ़ ने अपनी पवित्रता पर तनिक भी अहंकार न करते हुए सारा श्रेय अल्लाह की कृपा और क्षमा को दिया।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now