कुरान - 12:51 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

51
قَالَ مَا خَطۡبُكُنَّ إِذۡ رَٰوَدتُّنَّ يُوسُفَ عَن نَّفۡسِهِۦۚ قُلۡنَ حَٰشَ لِلَّهِ مَا عَلِمۡنَا عَلَيۡهِ مِن سُوٓءٖۚ قَالَتِ ٱمۡرَأَتُ ٱلۡعَزِيزِ ٱلۡـَٰٔنَ حَصۡحَصَ ٱلۡحَقُّ أَنَا۠ رَٰوَدتُّهُۥ عَن نَّفۡسِهِۦ وَإِنَّهُۥ لَمِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ

Transliteration: (Qaala maa khatbukunna iz raawattunna Yoosufa 'annafsih; qulna haasha lillaahi maa 'alimnaa 'alaihi min sooo'; qaalatim ra atul 'Azeezil 'aana hashasal haqq, ana raawat tuhoo 'an nafsihee wa innahoo laminas saadiqeen)

राजा ने (उन स्त्रियों से) पूछा, "तुम्हारा क्या मामला था जब तुमने यूसुफ़ को फुसलाने की कोशिश की थी?" उन्होंने कहा, "अल्लाह की पनाह! हमने उसमें ज़रा भी कोई बुराई नहीं पाई!" अज़ीज़ की पत्नी ने कहा, "अब सच्चाई खुलकर सामने आ गई है; मैंने ही उसे अपने वश में करने की कोशिश की थी, और निस्संदेह वह बिल्कुल सच्चा है!" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 51 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 51 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] "الْآنَ حَصْحَصَ الْحَقُّ" – सत्य का ऐतिहासिक प्रकटीकरण

राजा के सामने सभी कुलीन महिलाओं ने एक स्वर में गवाही दी कि यूसुफ़ का चरित्र दूध की तरह साफ़ है। अंततः ज़ुलैख़ा ने भी भरी अदालत में रोते हुए स्वीकार कर लिया कि सारी ग़लती मेरी थी, यूसुफ़ पूरी तरह सच्चा और पाकीज़ा है। सत्य को दबाया जा सकता है, लेकिन मिटाया नहीं जा सकता।

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