कुरान - 12:52 सूरह यूहफ़़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
ذَٰلِكَ لِيَعۡلَمَ أَنِّي لَمۡ أَخُنۡهُ بِٱلۡغَيۡبِ وَأَنَّ ٱللَّهَ لَا يَهۡدِي كَيۡدَ ٱلۡخَآئِنِينَ

Transliteration: (Zaalika liya'lama annee lam akhunhu bilghaibi wa annal laaha laa yahdee kaidal khaaa'ineen (End Juz 12))

(यूसुफ़ ने कहा:) "यह मैंने इसलिए किया ताकि अज़ीज़ जान ले कि मैंने उसकी पीठ पीछे उसके साथ कोई विश्वासघात (ख़यानत) नहीं किया था, और यह कि अल्लाह विश्वासघातियों की चाल को कभी सफल नहीं होने देता।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह यूहफ़़ आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह यूसुफ़ – आयत 52 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] अमानतदारी और वफ़ादारी का आदर्श

हज़रत यूसुफ़ ने स्पष्ट किया कि जेल से पहले जांच की मांग मैंने इसलिए की ताकि मेरे पुराने मालिक अज़ीज़ के दिल में कभी यह ख़्याल न आए कि मैंने उसकी अमानत में ख़यानत की थी। अल्लाह कभी धोखेबाज़ों की साज़िश को कामयाब नहीं होने देता।

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