Transliteration: (Ta'aamul aseem)
"गुनाहगारों का खाना [46] होगा।"
यहाँ जिस खाने का ज़िक्र है वह दोज़ख़ का वही ज़क़्क़ूम का दरख़्त है जो इंतिहाई बदमज़ा, ज़हरीला और तकलीफ़देह है। हदीस-ए-पाक में आया है कि अगर इस दरख़्त का एक क़तरा भी दुनिया में टपक पड़े, तो वह पूरी दुनिया के खाने-पीने की चीज़ों को सड़ा दे और इंसानों का जीना मुहाल कर दे।
यह ख़ौफ़नाक दरख़्त काफ़िरों और मुशरिकों का खाना होगा, क्योंकि यहाँ ‘गुनाहगारों’ (असी़म) से मुराद ख़ास तौर पर हठधर्म काफ़िर हैं जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल का इनकार किया।
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