कुरान - 44:42 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ

Transliteration: (Illaa mar rahimal laah' innahoo huwal 'azeezur raheem)

सिवाए उस शख़्स के जिस पर अल्लाह रहम फ़रमाए [44]; बेशक वही इज़्ज़त वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला [45] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 42

"सिवाए उस शख़्स के जिस पर अल्लाह रहम फ़रमाए [44]; बेशक वही इज़्ज़त वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला [45] है।"

[44] मोमिनीन के लिए रहमत और वसीला

यह इस्तिस्ना (छूट) साफ़ साबित करती है कि जिन पर अल्लाह की रहमत होगी, उन्हें उस दिन ज़रूर मदद पहुँचेगी। लफ़्ज़ “सिवाए” (इल्ला) ने पिछली आयत में मदद की आम मनाही को ख़ास कर दिया, जिससे साबित हुआ कि सच्चे मोमिनों—ख़ास तौर पर औलिया और नेकोकारों—को मौत के बाद भी मदद हासिल होगी और वे दूसरों के काम आएंगे।

[45] आख़िरत में रहमत-ए-ख़ास

दुनिया में अल्लाह तआला की आम रहमत और रिज़्क़ दोस्त और दुश्मन दोनों को पहुँचता है, लेकिन आख़िरत में अल्लाह की ख़ास रहमत सिर्फ़ अहले-ईमान के लिए मख़सूस होगी, जबकि मुनकिरीन के लिए सिर्फ़ सख़्त अज़ाब और जिल्लत होगी।

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