Transliteration: (Illaa mar rahimal laah' innahoo huwal 'azeezur raheem)
"सिवाए उस शख़्स के जिस पर अल्लाह रहम फ़रमाए [44]; बेशक वही इज़्ज़त वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला [45] है।"
यह इस्तिस्ना (छूट) साफ़ साबित करती है कि जिन पर अल्लाह की रहमत होगी, उन्हें उस दिन ज़रूर मदद पहुँचेगी। लफ़्ज़ “सिवाए” (इल्ला) ने पिछली आयत में मदद की आम मनाही को ख़ास कर दिया, जिससे साबित हुआ कि सच्चे मोमिनों—ख़ास तौर पर औलिया और नेकोकारों—को मौत के बाद भी मदद हासिल होगी और वे दूसरों के काम आएंगे।
दुनिया में अल्लाह तआला की आम रहमत और रिज़्क़ दोस्त और दुश्मन दोनों को पहुँचता है, लेकिन आख़िरत में अल्लाह की ख़ास रहमत सिर्फ़ अहले-ईमान के लिए मख़सूस होगी, जबकि मुनकिरीन के लिए सिर्फ़ सख़्त अज़ाब और जिल्लत होगी।
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