कुरान - 44:41 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
يَوۡمَ لَا يُغۡنِي مَوۡلًى عَن مَّوۡلٗى شَيۡـٔٗا وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ

Transliteration: (Yawma laa yughnee mawlan 'am mawlan shai'anw wa laa hum yunsaroon)

जिस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के कुछ काम न आएगा और न ही उनकी मदद की जाएगी [43]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 41

"जिस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के कुछ काम न आएगा और न ही उनकी मदद की जाएगी [43]।"

[43] मुनकिरीन के लिए इमदाद की मनाही और अहले-ईमान की शफ़ाअत

यह वईद और चेतावनी काफ़िरों और मुनकिरीन के लिए है—कि उस दिन उनका कोई दोस्त, रिश्तेदार या क़रीबी अज़ीज़ उन्हें अज़ाब से बचाने में कोई काम न आ सकेगा और न कहीं से उनकी मदद हो सकेगी।

लेकिन इसके बरअक्स, मोमिनीन पर अल्लाह का ख़ास फ़ज़्ल व करम होगा। उन्हें शफ़ाअत (सिफ़ारिश) के ज़रिए पूरी मदद पहुँचेगी—अंबिया-ए-किराम, औलिया-ए-इज़ाम और यहाँ तक कि मोमिनों के नाबालिग़ फ़ौत शुदा बच्चे भी अपने वालिदैन की शफ़ाअत फ़रमाएंगे और उनकी मग़फ़िरत व बुलंदी-ए-दरजात का वसीला बनेंगे।

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