कुरान - 44:39 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
مَا خَلَقۡنَٰهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ

Transliteration: (Maa khalaqnaahumaaa illaa bilhaqqi wa laakinna aksarahum laa ya'lamoon)

हमने उन्हें सिर्फ़ हक़ [40] (सच्ची हिकमत) के साथ बनाया है, लेकिन उनमें से अक्सर नहीं जानते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 39

"हमने उन्हें सिर्फ़ हक़ [40] (सच्ची हिकमत) के साथ बनाया है, लेकिन उनमें से अक्सर नहीं जानते।"

[40] हक़ और हिकमत के तहत तख़लीक़

आसमान और ज़मीन की तख़लीक़ एक सच्चे और हिकमत भरे मक़सद के तहत की गई है—ताकि इंसान अल्लाह पर ईमान लाए और उसकी फ़रमांबरदारी में ज़िंदगी गुज़ारे।

अल्लाह तआला फ़रमांबरदारों को अपनी रहमत से नेमतें अता फ़रमाएगा और नाफ़रमानों को उनके आमाल की सज़ा देगा। मगर अफ़सोस कि अक्सर लोग इस हक़ीक़त को नहीं समझते और ऐसे ज़िंदगी गुज़ारते हैं जैसे कायनात का कोई मक़सद ही न हो।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now