Transliteration: (Inna yawmal fasli meeqaatuhum ajma'een)
"बेशक फ़ैसले का दिन [41] उन सबके लिए मुक़र्ररा वक़्त [42] है।"
‘फ़ैसले का दिन’ (यौमुल फ़स्ल) से मुराद क़ियामत का दिन है, जिस दिन हक़ और बातिल के दरमियान पूरी तरह दो-टूक फ़र्क़ कर दिया जाएगा। उस दिन मोमिनों को काफ़िरों से अलग कर दिया जाएगा और हर इंसान के मुक़द्दर का आख़िरी व मुकम्मल फ़ैसला सुनाया जाएगा।
यह वह तयशुदा दिन है जब अल्लाह के तमाम वादे और चेतावनियाँ सच होकर सामने आ जाएंगी। मोमिनों को उनका जन्नत का इनाम मिलेगा और काफ़िरों को दोज़ख़ के अज़ाब में डाल दिया जाएगा। इससे साबित हुआ कि यह दुनिया मुकम्मल इंसाफ़ की जगह नहीं, बल्कि मुकम्मल इंसाफ़ आख़िरत ही में ज़ाहिर होगा।
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