कुरान - 44:40 सूरह अद-दुखान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
إِنَّ يَوۡمَ ٱلۡفَصۡلِ مِيقَٰتُهُمۡ أَجۡمَعِينَ

Transliteration: (Inna yawmal fasli meeqaatuhum ajma'een)

बेशक फ़ैसले का दिन [41] उन सबके लिए मुक़र्ररा वक़्त [42] है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अद-दुखान आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अद-दुख़ान तफ़सीर - आयत 40

"बेशक फ़ैसले का दिन [41] उन सबके लिए मुक़र्ररा वक़्त [42] है।"

[41] फ़ैसले के दिन का मफ़हूम

‘फ़ैसले का दिन’ (यौमुल फ़स्ल) से मुराद क़ियामत का दिन है, जिस दिन हक़ और बातिल के दरमियान पूरी तरह दो-टूक फ़र्क़ कर दिया जाएगा। उस दिन मोमिनों को काफ़िरों से अलग कर दिया जाएगा और हर इंसान के मुक़द्दर का आख़िरी व मुकम्मल फ़ैसला सुनाया जाएगा।

[42] इलाही वादों और वईदों का मुक़र्ररा वक़्त

यह वह तयशुदा दिन है जब अल्लाह के तमाम वादे और चेतावनियाँ सच होकर सामने आ जाएंगी। मोमिनों को उनका जन्नत का इनाम मिलेगा और काफ़िरों को दोज़ख़ के अज़ाब में डाल दिया जाएगा। इससे साबित हुआ कि यह दुनिया मुकम्मल इंसाफ़ की जगह नहीं, बल्कि मुकम्मल इंसाफ़ आख़िरत ही में ज़ाहिर होगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now