Transliteration: (Ara-aita in kaz zaba wa ta walla )
Will You See, If He Belied and Turned Back, Then What Would Be His Condition?
आयत का संदर्भ और अर्थ (Context and Meaning of the Verse):
यह आयत अबू जहल के बारे में है, जिसने सत्य को नकारा और ईमान से मुँह मोड़ लिया, जबकि वह नबी ﷺ की उपस्थिति में था। आयत यह बताती है कि वह अपने अविश्वास और नाफरमानी के कारण कितनी गंभीर सजा का सामना करेगा।
इस आयत में इशारा किया गया है कि जो लोग नबी ﷺ की मौजूदगी में सत्य को नकारते हैं, उनकी स्थिति उन काफ़िरों से भी बदतर होती है जो इस संदेश को सुनने का मौका नहीं पा सके। जिस तरह अदालत में न्यायाधीश के सामने अपराध करना एक बड़ा अपराध माना जाता है, वैसे ही नबी ﷺ के सामने सत्य को नकारना और उनका विरोध करना कहीं अधिक गंभीर गुनाह है।
नबी ﷺ की आज्ञाकारिता सभी पर अनिवार्य है (Obedience to the Prophet ﷺ is Mandatory, Even for Non-Believers):
नकार और अवज्ञा का दंड (Punishment for Rejection and Disobedience):
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