कुरान - 6:27 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَلَوۡ تَرَىٰٓ إِذۡ وُقِفُواْ عَلَى ٱلنَّارِ فَقَالُواْ يَٰلَيۡتَنَا نُرَدُّ وَلَا نُكَذِّبَ بِـَٔايَٰتِ رَبِّنَا وَنَكُونَ مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

Transliteration: (Wa law taraaa iz wuqifoo 'alan Naari faqaaloo yaa laitanaa nuraddu wa laa nukaz ziba bi Aayaati Rabbinaa wa nakoona minal mu'mineen)

और (ऐ रसूल!) काश तुम देख सकते जब उन्हें आग पर खड़ा किया जाएगा [52], तो वे कहेंगे: "हाय! काश हमें (दुनिया में) लौटा दिया जाता, तो हम अपने रब की आयतों को न झुठलाते और हम मुसलमान हो जाते।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 27 की तफ़्सीर

✅ [52] आग के किनारे पर पछतावा

"खड़ा किया जाएगा" से मुराद वो ख़ौफ़नाक मंज़र है
जब काफ़िरों को जहन्नम की आग के सामने लाया जाएगा,
बस गिराने से पहले, सारे गुनाह उनके सामने होंगे —
रसवाई, शर्मिंदगी, और घबराहट से भरा हुआ वक़्त।

उस हालत में वे कहेंगे:
"काश हमें वापस दुनिया में भेजा जाता,
तो हम अल्लाह की आयतों को कभी न झुठलाते,
और मुसलमान बन जाते।"

मगर ये अफसोस और वादा,
उस वक़्त का होगा जब तौबा का दरवाज़ा बंद हो चुका होगा —
ये पछतावा बिलकुल बेकार होगा।
इससे साबित होता है कि अज़ाब शुरू होने से पहले ही,
उन्हें अपने तमाम गुनाह याद होंगे।

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