कुरान - 6:1 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

1
ٱلۡحَمۡدُ لِلَّهِ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَجَعَلَ ٱلظُّلُمَٰتِ وَٱلنُّورَۖ ثُمَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بِرَبِّهِمۡ يَعۡدِلُونَ

Transliteration: (Alhamdu lillaahil lazee khalaqas samaawaati wal arda wa ja'alaz zulumaati wannoor; summal lazeena kafaroo bi Rabbihim ya'diloon)

सारी तारीफ़ अल्लाह ही के लिए है जिसने आसमानों को पैदा किया [1], और ज़मीन को, और बनाई अंधेरे और रोशनी [2], फिर भी काफ़िर लोग अपने रब के बराबर ठहराते हैं [3]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 1 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 1 की तफ़्सीर

✅ [1] आसमान बहुवचन में और ज़मीन एकवचन में क्यों

क़ुरआन हमेशा “आसमानों” को बहुवचन और “ज़मीन” को एकवचन में बयान करता है, क्योंकि ज़मीन की परतें आपस में जुड़ी हुई हैं, जबकि आसमान सात होकर भी एक-दूसरे से अलग-अलग हैं। यह इलाही बयान में पूर्ण सटीकता का सुबूत है, कोई विरोधाभास नहीं।

✅ [2] अंधेरे अनेक हैं, लेकिन रोशनी एक है

आयत में “अंधेरे” को बहुवचन और “रोशनी” को एकवचन में लाया गया है, जिससे ये हक़ीक़त सामने आती है कि गुमराही की राहें बहुत सारी होती हैं, लेकिन हिदायत (सच्चाई) एक ही है। जैसे दुनिया में अंधेरे की कई शक्लें होती हैं, वैसे ही कुफ़्र और गुनाह की भी बहुत सी शक्लें हैं, जबकि सच्चा रास्ता एक है — अल्लाह की रोशनी।

✅ [3] शिर्क की बुनियाद बराबरी का भ्रम

शिर्क करने से पहले इंसान दिल में बराबरी का एक झूठा गुमान पालता है। मक्का के मुशरिक फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ मानते थे, और ईसाई हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह का बेटा।
वे मख़लूक को ख़ालिक़ का हिस्सा समझते हुए पूजा करते थे, लेकिन मोमिनों का यक़ीन होता है कि नबी और औलिया सब अल्लाह के बंदे हैं, न कि उसके बराबर।
इसलिए इस आयत को मुसलमानों पर लागू करना ग़लत और गुमराह करने वाला है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now