कुरान - 6:5 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

5
فَقَدۡ كَذَّبُواْ بِٱلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمۡ فَسَوۡفَ يَأۡتِيهِمۡ أَنۢبَـٰٓؤُاْ مَا كَانُواْ بِهِۦ يَسۡتَهۡزِءُونَ

Transliteration: (Faqad kazzaboo bilhaqqi lammaa jaaa'ahum fasawfa ya'teehim ambaaa'u maa kaanoo bihee yastahzi'oon)

फिर उन्होंने सच्चाई को झुठला दिया जब वह उनके पास आई [9], तो अब वह ख़बर उन्हें आकर रहेगी जिसका वे मज़ाक उड़ाते थे [10]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 5 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 5 की तफ़्सीर

✅ [9] अल्लाह के भेजे हक़ का इंकार

“सच्चाई को झुठलाया” से मुराद है क़ुरआन, रसूल ﷺ, अल्लाह के हुक्म और मोजज़ात का इनकार।
इनकार करने वालों ने हक़ को जानबूझकर ठुकराया, और घमंड को इल्म और हिदायत पर तरजीह दी।
हक़ बिल्कुल वाज़ेह था, फिर भी उन्होंने उसे नहीं अपनाया।

✅ [10] जिन बातों का मज़ाक उड़ाया, वही सच्चाई बनकर सामने आएंगी

यहाँ “वह ख़बर” से मुराद है वे अज़ाब और हिदायतें जिनका वे मज़ाक उड़ाते थे — जैसे बद्र की शिकस्त, मौत का अज़ाब, क़ब्र का हिसाब, और क़ियामत का दिन।
ये चीज़ें दूर नहीं हैं, बल्कि क़रीब हैं, और यक़ीनन हक़ीक़त बनकर सामने आने वाली हैं।

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