और उनके पास उनके रब की कोई निशानी नहीं आती, मगर वे उससे मुँह फेर लेते हैं।
हर बार जब अल्लाह की कोई आयत या निशानी उनके सामने आती है, तो ये लोग जानबूझकर उसका इंकार करते हैं।
चाहे वह क़ुरआन की आयतें हों, नबी के मोजज़े हों, या क़ायनात की निशानियाँ — ये सब उनके लिए बेअसर हो जाती हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही मुंह फेरने का रवैया अपना लिया होता है।
यह आयत बताती है कि हिदायत सिर्फ़ उन लोगों को मिलती है जो दिल से उसे अपनाने को तैयार हों।
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सूरह अल-अनाम आयत 4 तफ़सीर