कुरान - 6:4 सूरह अल-अनाम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

4
وَمَا تَأۡتِيهِم مِّنۡ ءَايَةٖ مِّنۡ ءَايَٰتِ رَبِّهِمۡ إِلَّا كَانُواْ عَنۡهَا مُعۡرِضِينَ

Transliteration: (Wa maa ta'teehim min Aayatim min Aayaati Rabbihim illaa kaanoo 'anhaa mu'rideen)

और उनके पास उनके रब की कोई निशानी नहीं आती, मगर वे उससे मुँह फेर लेते हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अनाम आयत 4 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-अनआम – आयत 4 की तफ़्सीर

✅ [9] अल्लाह की हर निशानी को ठुकरा देना

हर बार जब अल्लाह की कोई आयत या निशानी उनके सामने आती है, तो ये लोग जानबूझकर उसका इंकार करते हैं।
चाहे वह क़ुरआन की आयतें हों, नबी के मोजज़े हों, या क़ायनात की निशानियाँ — ये सब उनके लिए बेअसर हो जाती हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही मुंह फेरने का रवैया अपना लिया होता है।
यह आयत बताती है कि हिदायत सिर्फ़ उन लोगों को मिलती है जो दिल से उसे अपनाने को तैयार हों।

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