Transliteration: (Huwal lazee khalaqakum min teenin summa qadaaa ajalanw wa ajalum musamman 'indahoo summa antum tamtaroon)
यहाँ हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) की मिट्टी से पैदाइश की ओर इशारा है, जिनसे पूरी इंसानी नस्ल निकली।
दूसरे अर्थ में यह भी हो सकता है कि इंसानी नुत्फ़ा (वीर्य) जो खून से बनता है, और खून खाने-पीने से, और वह मिट्टी से — इस तरह इंसान की जिस्मानी अस्ल मिट्टी से है।
चूँकि मिट्टी का मूल भी पानी है, इसलिए एक और आयत में फ़रमाया: “हमने हर ज़िंदा चीज़ को पानी से पैदा किया” (सूरा 21:30)।
इस तरह मिट्टी और पानी दोनों से इंसानी सृष्टि की शुरुआत साबित होती है।
इंसान को पैदा करने के बाद, अल्लाह ने हर एक के लिए एक निश्चित ज़िंदगी तय कर दी, जो मौत पर खत्म होती है।
यहाँ तक कि हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) द्वारा जिनको ज़िंदा किया गया, वे भी एक वक़्त के बाद फिर मर गए।
यह अल्लाह की क़ुदरत और हिकमत का इज़हार है, और यह हश्र या मोजज़ों से टकराता नहीं।
“एक निश्चित वक़्त उसके पास है” — इसका मतलब है क़ियामत का दिन, जब सबको दोबारा ज़िंदा किया जाएगा।
यह वक़्त अल्लाह की तरफ़ से मुक़र्रर है, लेकिन बहुत से लोग अब भी उस पर शक करते हैं।
इस आयत में उसी शक का जवाब है, कि हक़ीक़त में दोबारा ज़िंदगी बिलकुल यक़ीनी है, और उसका इल्म सिर्फ़ अल्लाह के पास है।
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