"तो उनकी यह पुकार बराबर जारी रही यहाँ तक कि हमने उन्हें कटी हुई खेती की तरह बुझा कर ढेर कर दिया।"
उनकी चीख़-पुकार उस वक़्त तक बंद न हुई जब तक कि वे कटी हुई फ़सल की तरह बे-जान और बुझी हुई राख की तरह ढेर न हो गए।
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