कुरान - 21:13 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

13
لَا تَرۡكُضُواْ وَٱرۡجِعُوٓاْ إِلَىٰ مَآ أُتۡرِفۡتُمۡ فِيهِ وَمَسَٰكِنِكُمۡ لَعَلَّكُمۡ تُسۡـَٔلُونَ

Transliteration: (Laa tarkudoo warji'ooo ilaa maaa utriftum feehi wa masaakinikum la'allakum tus'aloon)

13. 'भागो मत! और लौट जाओ उन ऐश व इशरत की चीज़ों की तरफ़ जो तुम्हें दी गई थीं [21] और अपने घरों की तरफ़, ताकि तुमसे बाज़पुर्स की जाए [22] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 13 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 13 की तफ़सीर

" 'भागो मत! और लौट जाओ उन ऐश व इशरत की चीज़ों की तरफ़ जो तुम्हें दी गई थीं [21] और अपने घरों की तरफ़, ताकि तुमसे बाज़पुर्स की जाए [22] ।' "

[21] ज़िल्लत व तंज़ का हुक्म (अम्रे ताजीज़)

यह हुक्म तंज़िया तौर पर है कि अगर तुम्हारी दौलत और महलों में ताक़त थी, तो अब जाओ और उनसे अपनी जान बचाओ! यह उनकी बेबसी को उजागर करने के लिए फ़रमाया गया।

[22] मुजरिमों का रो-रोकर एतराफ़े जुर्म

ताकि लोग उनसे पूछें कि तुम्हारी वह शानो-शौकत कहाँ गई, और वे ज़लील होकर अपने कुफ़्र और नाफ़रमानी का रो-रोकर एतराफ़ करें।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now