कुरान - 21:11 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

11
وَكَمۡ قَصَمۡنَا مِن قَرۡيَةٖ كَانَتۡ ظَالِمَةٗ وَأَنشَأۡنَا بَعۡدَهَا قَوۡمًا ءَاخَرِينَ

Transliteration: (Wa kam qasamnaa min qaryatin kaanat zaalimatanw wa ansha' naa ba'dahaa qawman aakhareen)

11. और कितनी ही बस्तियां जो ज़ालिम थीं [18] हमने उन्हें पीस डाला, और उनके बाद दूसरी क़ौम को पैदा फ़रमाया [19] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 11 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 11 की तफ़सीर

"और कितनी ही बस्तियां जो ज़ालिम थीं [18] हमने उन्हें पीस डाला, और उनके बाद दूसरी क़ौम को पैदा फ़रमाया [19] ।"

[18] कुफ़्र व शिर्क सबसे बड़ा ज़ुल्म

ज़ालिम बस्तियों से मुराद वे शहर हैं जहाँ के बाशिंदों ने कुफ़्र व शिर्क अख़्तियार किया। सूरह लुक़मान (आयत 13) में फ़रमाया: "बेशक शिर्क बहुत बड़ा ज़ुल्म है।"

[19] सरकशों की जगह सालेह क़ौम का क़ियाम

अबू जहल जैसे सरकश क़ुरैश तबाह कर दिए गए, और उनकी जगह मदीना के अंसार और सच्चे मोमिनीन को इस्लाम की अज़ीम ख़िदमत का शर्फ़ अता फ़रमाया गया।

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