कुरान - 21:10 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
لَقَدۡ أَنزَلۡنَآ إِلَيۡكُمۡ كِتَٰبٗا فِيهِ ذِكۡرُكُمۡۚ أَفَلَا تَعۡقِلُونَ

Transliteration: (Laqad anzalnaaa ilaikum Kitaaban feehi zikrukum afalaa ta'qiloon (Section 1))

10. बेशक हमने तुम्हारी तरफ़ एक ऐसी किताब नाज़िल फ़रमाई है जिसमें तुम्हारी ही इज़्ज़त व बुज़ुर्गी है [17]; तो क्या तुम्हें अक़्ल नहीं? (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 10 की तफ़सीर

"बेशक हमने तुम्हारी तरफ़ एक ऐसी किताब नाज़िल फ़रमाई है जिसमें तुम्हारी ही इज़्ज़त व बुज़ुर्गी है [17]; तो क्या तुम्हें अक़्ल नहीं?"

[17] क़ुरआने मजीद के ज़रिये उम्मत की सरफ़राज़ी

इस आयत में क़ुरआने अज़ीम की शान बयान फ़रमाई गई कि यह किताब उम्मत के लिए दुनियवी इज़्ज़त, अख़लाक़ी शराफ़त और आख़िरत की कामियाबी का ज़ामिन है। जो क़ौम क़ुरआन को थामेगी, दुनिया में सरबुलंद होगी।

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