Transliteration: (Laqad anzalnaaa ilaikum Kitaaban feehi zikrukum afalaa ta'qiloon (Section 1))
"बेशक हमने तुम्हारी तरफ़ एक ऐसी किताब नाज़िल फ़रमाई है जिसमें तुम्हारी ही इज़्ज़त व बुज़ुर्गी है [17]; तो क्या तुम्हें अक़्ल नहीं?"
इस आयत में क़ुरआने अज़ीम की शान बयान फ़रमाई गई कि यह किताब उम्मत के लिए दुनियवी इज़्ज़त, अख़लाक़ी शराफ़त और आख़िरत की कामियाबी का ज़ामिन है। जो क़ौम क़ुरआन को थामेगी, दुनिया में सरबुलंद होगी।
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