कुरान - 21:112 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

112
قَٰلَ رَبِّ ٱحۡكُم بِٱلۡحَقِّۗ وَرَبُّنَا ٱلرَّحۡمَٰنُ ٱلۡمُسۡتَعَانُ عَلَىٰ مَا تَصِفُونَ

Transliteration: (Qaala Rabbih kum bil haqq; wa Rabbunar Rahmaa nul musta'aanu 'alaa maa tasifoon (section 7))

112. रसूल ने दुआ की, 'ऐ मेरे रब! तू हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा दे [172]; और हमारा रब ही रहमान है जिससे उन बातों पर मदद मांगी जाती है जो तुम (झूठ) बयान करते हो!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 112 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 112 की तफ़सीर

"रसूल ने दुआ की, 'ऐ मेरे रब! तू हक़ के साथ फ़ैसला फ़रमा दे [172]; और हमारा रब ही रहमान है जिससे उन बातों पर मदद मांगी जाती है जो तुम (झूठ) बयान करते हो!'"

[172] रसूले अकरम (ﷺ) की दुआ-ए-फ़ैसला और नुसरते इलाही

काफ़िरों की मुसलसल सरकशी और हठधर्मी के बाद हुज़ूर (ﷺ) ने अल्लाह के हुज़ूर फ़ैसले की अर्ज़ की। चुनांचे अल्लाह ने जंगे बद्र में हक़ व बातिल का ऐसा फ़ैसला फ़रमाया कि इस्लाम सरबुलन्द हुआ और कुफ़्र के बड़े-बड़े सरदार ज़िल्लत की मौत मारे गए।

और आप (ﷺ) ने फ़रमाया कि मुशरिकों के तमाम झूठे दावों, बुहतानों और साज़िशों के मुक़ाबले में हमारा मुहाफ़िज़ व मददगार सिर्फ़ हमारा मेहरबान रब — रहमान है!

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