Transliteration: (Innahoo ya'lamul jahra minal qawli wa ya'lamu maa taktumoon)
"बेशक वह खुली आवाज़ में कही हुई बात को भी जानता है और जो कुछ तुम छुपाते हो उसे भी ख़ूब जानता है [170] ।"
अल्लाह तआला का इल्म ज़ाहिर और पोशीदा तमाम चीज़ों को मुहीत है। काफ़िरों की खुली मुख़ालफ़त, मज़ाक़ और दिलों में छुपे हुए बुग़्ज़, कीने और साज़िशों का एक-एक ज़र्रा अल्लाह के इल्म में है और वह इन सबकी पूरी-पूरी सज़ा देगा।
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