कुरान - 21:110 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

110
إِنَّهُۥ يَعۡلَمُ ٱلۡجَهۡرَ مِنَ ٱلۡقَوۡلِ وَيَعۡلَمُ مَا تَكۡتُمُونَ

Transliteration: (Innahoo ya'lamul jahra minal qawli wa ya'lamu maa taktumoon)

110. बेशक वह खुली आवाज़ में कही हुई बात को भी जानता है और जो कुछ तुम छुपाते हो उसे भी ख़ूब जानता है [170] । (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 110 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 110 की तफ़सीर

"बेशक वह खुली आवाज़ में कही हुई बात को भी जानता है और जो कुछ तुम छुपाते हो उसे भी ख़ूब जानता है [170] ।"

[170] इल्मे इलाही का अहाता: ज़ाहिर व बातिन

अल्लाह तआला का इल्म ज़ाहिर और पोशीदा तमाम चीज़ों को मुहीत है। काफ़िरों की खुली मुख़ालफ़त, मज़ाक़ और दिलों में छुपे हुए बुग़्ज़, कीने और साज़िशों का एक-एक ज़र्रा अल्लाह के इल्म में है और वह इन सबकी पूरी-पूरी सज़ा देगा।

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