कुरान - 21:108 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

108
قُلۡ إِنَّمَا يُوحَىٰٓ إِلَيَّ أَنَّمَآ إِلَٰهُكُمۡ إِلَٰهٞ وَٰحِدٞۖ فَهَلۡ أَنتُم مُّسۡلِمُونَ

Transliteration: (Qul innamaa yoohaa ilaiya annamaaa ilaahukum illaahunw Waahid, fahal antum muslimoon)

108. कह दीजिए कि 'मेरी तरफ़ तो बस यह वह्य की जाती है कि तुम्हारा माबूद बस एक ही माबूद है [167]; तो क्या तुम फ़रमांबरदार (मुस्लिम) बनते हो?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 108 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 108 की तफ़सीर

"कह दीजिए कि 'मेरी तरफ़ तो बस यह वह्य की जाती है कि तुम्हारा माबूद बस एक ही माबूद है [167]; तो क्या तुम फ़रमांबरदार (मुस्लिम) बनते हो?'"

[167] दावत-ए-दीन का मरकज़: अक़ीदा-ए-तौहीद

हुज़ूर (ﷺ) की रिसालत का बुनियादी और मरकज़ी पैग़ाम तौहीद है कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। जब यह बात वाज़ेह हो गई, तो फिर अक़्ल का तक़ाज़ा यही है कि इंसान अपनी सरकशी छोड़ कर सच्चे दिल से अल्लाह के हुज़ूर सर झुका दे और मुस्लिम (फ़रमाँबरदार) बन जाए।

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