Transliteration: (Qul innamaa yoohaa ilaiya annamaaa ilaahukum illaahunw Waahid, fahal antum muslimoon)
"कह दीजिए कि 'मेरी तरफ़ तो बस यह वह्य की जाती है कि तुम्हारा माबूद बस एक ही माबूद है [167]; तो क्या तुम फ़रमांबरदार (मुस्लिम) बनते हो?'"
हुज़ूर (ﷺ) की रिसालत का बुनियादी और मरकज़ी पैग़ाम तौहीद है कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। जब यह बात वाज़ेह हो गई, तो फिर अक़्ल का तक़ाज़ा यही है कि इंसान अपनी सरकशी छोड़ कर सच्चे दिल से अल्लाह के हुज़ूर सर झुका दे और मुस्लिम (फ़रमाँबरदार) बन जाए।
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