कुरान - 21:109 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

109
فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقُلۡ ءَاذَنتُكُمۡ عَلَىٰ سَوَآءٖۖ وَإِنۡ أَدۡرِيٓ أَقَرِيبٌ أَم بَعِيدٞ مَّا تُوعَدُونَ

Transliteration: (Fa in tawallaw faqul aazantukum 'alaa sawaaa'; wa in adreee aqareebun am ba'eedun maa too'adoon)

109. फिर अगर वे मुंह फेरें, तो कह दीजिए कि 'मैंने तुम्हें बराबर तौर पर (हक़ बात से) आगाह कर दिया है [168]; और मुझे नहीं मालूम कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वादा किया जाता है वह क़रीब है या दूर [169] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 109 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 109 की तफ़सीर

"फिर अगर वे मुंह फेरें, तो कह दीजिए कि 'मैंने तुम्हें बराबर तौर पर (हक़ बात से) आगाह कर दिया है [168]; और मुझे नहीं मालूम कि जिस (अज़ाब) का तुमसे वादा किया जाता है वह क़रीब है या दूर [169] ।'"

[168] तबलीग़े हक़ में बराबरी और हुज्जत का तमाम होना

हुज़ूर (ﷺ) ने फ़रमाया कि मैंने किसी तफ़रीक़ के बग़ैर तुम सबको अल्लाह के दीन और अज़ाब से साफ़-साफ़ आगाह कर दिया है ताकि कल कोई यह न कह सके कि हमें ख़बर न दी गई थी। हुज्जत तमाम हो चुकी है।

[169] अज़ाब के तयशुदा वक़्त का इल्मे इलाही

अज़ाब और क़ियामत का मुअय्यन वक़्त अल्लाह के इल्मे ग़ैब में महफ़ूज़ है। हुज़ूर (ﷺ) ने वाज़ेह फ़रमाया कि अज़ाब का आना क़तई और यक़ीनी है, लेकिन उसका मुक़र्रर दिन और लम्हा अल्लाह की हिकमत पर मौक़ूफ़ है।

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