कुरान - 21:111 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

111
وَإِنۡ أَدۡرِي لَعَلَّهُۥ فِتۡنَةٞ لَّكُمۡ وَمَتَٰعٌ إِلَىٰ حِينٖ

Transliteration: (Wa in adree la'allahoo fitnatul lakum wa mataa'un ilaaheen)

111. और मुझे नहीं मालूम, शायद यह (अज़ाब में ताख़ीर) तुम्हारे लिए एक आज़माइश हो [171] और एक मुक़र्रर वक़्त तक का नफ़ा उठाना हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 111 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 111 की तफ़सीर

"और मुझे नहीं मालूम, शायद यह (अज़ाब में ताख़ीर) तुम्हारे लिए एक आज़माइश हो [171] और एक मुक़र्रर वक़्त तक का नफ़ा उठाना हो।"

[171] दुनियावी ढील: आज़माइश और वबाल

काफ़िरों पर फ़ौरन अज़ाब का न आना कोई रहमत नहीं बल्कि उनके लिए एक आज़माइश और इस्तेदराज है। वे जितनी लम्बी उम्र पाएंगे और दुनिया से नफ़ा उठाएंगे, गुनाहों में इज़ाफ़ा करके आख़िरत में अपने अज़ाब को और ज़ियादा सख्त कर लेंगे।

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