Transliteration: (Inna fee haaza labalaa ghal liqawmin 'aabideen)
"बेशक इसमें (क़ुरआन में) इबादतगुज़ार लोगों के लिए एक बड़ा पैग़ाम (काफ़ी सामान) है [165] ।"
क़ुरआने मजीद अल्लाह के नेक और इबादतगुज़ार बंदों के लिए दुनिया व आख़िरत की निजात का मुकम्मल ज़रिया और काफ़ी पैग़ाम है। जो इस पर ईमान लाए और हुज़ूर (ﷺ) की सुन्नत के मुताबिक़ इस पर अमल करे, उसे किसी और निज़ाम या फ़लसफ़े की हाजत नहीं रहती।
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