कुरान - 21:105 सूरह अल-अंबिया अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

105
وَلَقَدۡ كَتَبۡنَا فِي ٱلزَّبُورِ مِنۢ بَعۡدِ ٱلذِّكۡرِ أَنَّ ٱلۡأَرۡضَ يَرِثُهَا عِبَادِيَ ٱلصَّـٰلِحُونَ

Transliteration: (Wa laqad katabnaa fiz Zaboori min ba'diz zikri annal arda yarisuhaa 'ibaadi yas saalihoon)

105. और यक़ीनन हमने लिख दिया था [163] ज़बूर में नसीहत के बाद कि 'ज़मीन के वारिस मेरे नेक बन्दे ही होंगे [164] ।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-अंबिया आयत 105 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह अल-अंबिया — आयत 105 की तफ़सीर

"और यक़ीनन हमने लिख दिया था [163] ज़बूर में नसीहत के बाद कि 'ज़मीन के वारिस मेरे नेक बन्दे ही होंगे [164] ।'"

[163] ज़बूर और तौरात में इलाही पेशीनगोई

अल्लाह तआला ने लौहे महफ़ूज़ और तौरात के बाद हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) की ज़बूर में भी यह क़तई फ़ैसला लिख दिया था जो तब्दील नहीं हो सकता।

[164] सालेह बंदों की विरासत

इसके दो अज़ीम मफ़हूम हैं:

  • दुनियावी एतबार से: ज़मीन की हुकूमत और ख़िलाफ़त बिल-आख़िर उम्मते मुहम्मदिया (ﷺ) और सालेह मोमिनीन को अता की जाएगी।

  • उख़रवी एतबार से: जन्नत की अज़ीम सरज़मीन के हक़ीक़ी वारिस सिर्फ़ अल्लाह के नेक और बा-ईमान बंदे ही होंगे।

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